उत्तराखंड की राजधानी क्या गैरसेंण होनी चाहिए !
सबसे बड़ा सवाल है आम आदमी को इससे बहुत कुछ लेना है लेकिन देहरादून मैं बैढे हमारे ये नेता क्या कभी हमारी राय ली नहीं
मोहन गिरी बाबा ने राजधानी के लिए अपना ये त्याग दिया उसकी मौत रहस्य बनी हुई है चाहे भाजपा हो या कांग्रेश केवल गद्धी के भूखे है न आम जनता के हितेषी !
मैं राजनीती में विश्वाश करता हूँ लेकिन साथ ही पहाड़ की संस्कृत को हम दरकिनार नही कर सकते है क्योकि हम उस संस्कृत में पाले बढे है लेकिन इन दलों को गैरसेंण राजधानी को बनाने के लिए क्या आपति है
2010 को माननीय मुख्यमंत्री निशंक जी को दिल्ली के रोहणी के एक समारोह में एक बुजुर्ग ब्यक्ति ने कह दिया की निशंक जी आप पहले ये बताओ की गैरसेंण राजधानी कब बनेगी मुख्यमंत्री ने मौन साध दी
अगर आप उत्तराखंड की क्षेत्रफल दृष्टि से भी देखते है तो आपको गैरसेंण लगभग सभी क्षेत्रों की दिर्ष्टिकोण से सही है
उत्तराखंड के 42 शहीदों जो राम पुर तिराहे पर जो हाल हुवा था क्या उनका सपना अभी साकार हुआ है कोशिस आप व हमारी यही रहेगी की उनका यह सपना हम साकार करे
आपका भाई भवान सिंह मनाई
ग्राम व पो० ओ० रिक्साल
पट्टी - चौथान
ब्लाक - थैलिसेंण
जिला - पौड़ी गढ़वाल ( उत्तराखंड)
मो० न० # 9654571552